सोमवार 19 जनवरी 2026 - 14:46
आकाश से स्टार लिंक तक / सुन्नी छात्र का विचारत्मक लेख

हौज़ा / हाल के वर्षो मे हमने देखा कि जब उपनिवेशवाद ने ईरान के आंतरिक इस्तेहकाम को नुकसान पहुचाने के लिए ऐलन मस्क की स्टार लिंक सैटेलाइट का सहारा लिया तो जाहिरी रूप से लखता था कि धरती पर मौजूद कोई भी शक्ति खला से आने वाले इस डीजिटल सैलाब को नही रोक सकेगी।

लेखकः अब्दुल्लाह फ़ारूक़ी : 

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ः मै एक पुराने धार्मिक मदरसे की उन चार दीवारीयो पर पला बढ़ा हू जहा कालल्लाहो तआला और क़ालर रसूल (स) की आवाज़े गूंजती है। बचपन से ही हदीसी किताबो मे एक हदीस पढ़ कर अधिकांश अचंभित रह जाता था। यह हदीस इमाम बुखारी और इमाम मुस्लिम ने बयान की है, जिसके शब्द कुछ इस प्रकार है।

"لَوْ كَانَ الْإِيمَانُ (وفی روایۃ: الْعِلْمُ) عِنْدَ الثُّرَيَّا، لَنَالَهُ رِجَالٌ مِنْ هَؤُلَاءِ" लो कानल ईमानो (व फी रिवायतेः अल इल्मो) इनदस सुरय्या, ला नालहू रेजालुन मि हऊलाए

(अनुवादः अगर ईमान (या इल्म) सुरय्या सितारे के पास भी चला जाए, तो इन (अहले फ़ार्स) मे से कुछ लोग उसे हासिल कर लेगें)

मै अधिकांश सोचता था कि इस इल्म का अर्थ शायद केवल फ़िक्ह, हदीस या तसव्वुफ़ का इल्म है, जिसकी सेवा अतीत मे इमाम बुखारी और इमाम अबू हनीफ़ा जैसे वरिष्ठ लोगो ने की लेकिन आज जब मै दौरे हाज़िर के वैश्विक निगाह और इस्लामी गणतंत्र ईरान की वैज्ञानिक और टैक्नालॉजीकल विकास को देखता हूं तो मेरे मन के बंद दरवाज़े खुलने लगते है। मुझे समझ आया कि हजूर (स) की निगाह नबूवत केवल अतीत ही नही बल्कि भविष्य के उन साइबर वारईज को भी देख रही थी जो सुरय्या (खला) मे बिखे जालो को अपनी ज़हानत से मुसख्खर करेगें।

डीजिटल सुरय्या और स्टार लिंक चैलेंज

ڈیجیٹل ثریا اور اسٹار لنک کا چیلنج

हाल के वर्षो मे हमने देखा कि जब उपनिवेशवाद ने ईरान के आंतरिक इस्तेहकाम को नुकसान पहुचाने के लिए  ऐलन मस्क की स्टार लिंक सैटेलाइट का सहारा लिया तो जाहिरी रूप से लखता था कि धरती पर मौजूद कोई भी शक्ति खला से आने वाले इस डीजिटल सैलाब को नही रोक सकेगी। आकाश पर हज़ारो सैटेलाइटो का एक ऐसा जाल बिछा दिया गया जिसे अपराजित करार दिया जा रहा है।

लेकिन फिर दुनिया ने देखा कि वह कौम जिसके बारे मे सादिक और अमीन (स) ने खुशखबरी दी थी, मैदान मे उतरी।

ईरान के वैज्ञानिको केवल तीन दिनो के अंदर इस पैचीदा तरीन सैटेलाइट नेटवर्क को फ्रीकेंसीयो को ट्रेस किया और एक ऐसा इलैक्ट्रनिक युद्ध लगा कि वह सिगनल्स जो सुरय्या की उचाईयो से धरती पर फ़ितने फैला रहे थे। वही दम तोड़ गए।

यह घटना केवल एक फ़ौजी दिफाअ नही था बल्कि इस हदीस की व्यवहारिक व्याख्या थी कि अगर इल्म सुरय्या पर भी होगा, तो यह लोग उसे हासिल कर लेंगे।

ईरानः व्यवहारिक और वैज्ञानिक विकास का मीनार 

आज का ईरान केवल जज़्बात का नाम नही बल्कि वह इल्म और हिकमत का ऐसा केंद्र बन चुका है जो सुप्रीम लीडर सय्यद अली खामेनई के नेतृत्व मे विकास के मार्ग पर अग्रसर है।

सुप्रीम लीडर ने हमेशा नालिज प्रोडक्शन  (Knowledge Production) पर जोर दिया, जिसका परिणाम यह है कि आज ईरान नैनो टेक्नालाजी और स्टीम सैल्स मे दुनिया की पहली पंक्तियो के देशो मे सम्मिलित है, मैडिकल साइंस और परमाणु ऊर्जा मे आत्मनिर्भर हो चुका है। और अब साइबर स्पेस और ईरो स्पेस मे सूपर पावर की आंखो मे आंखे डाल कर बात कर रहा है।

सुन्नी और ईरान से मोहब्बत

सुन्नी छात्र होने के नाते मेरा ईसान से प्रेम किसी मसलकी तअस्सुब पर आधारित नही बल्कि उस क़ुरआनी आदेश पर आधारित है जिसमे अल्लाह तआला फ़रमाता है वा आख़ेरून मिनहुम लम्मा यलहक़ू बेहिम (और दूसरो के लिए भी जो अभी इनसे नही मिले) जब सहाबा ने पूछा कि वह कौन लोग है ? तो हूजूर (स) ने हज़रत सलमान फ़ारसी के कंधे पर हाथ रख कर इनकी क़ौम की निशानदही फरमाई।  

हमारे प्यारे की निसबत जिस कौम से जुड़ जाए, उससे मोहब्बत करना हमारे ईमान का हिस्सा है। आज जब इस्लामी जगत मजमूई रूप से टेक्नालॉजी के लिए पश्चिम का मोहताज है, ऐसे मे ईरान का सिर उठा कर खड़ा होना हर मुस्लमान के लिए गर्व की बात है।

समापन 

आज मुझे इस हदीस का अर्थ अपने मदरसे की किताबो से निकल कर आकाश मे चमकता हुआ नज़र आता है, मै यह समझ चुका हूं कि इस्लाम केवल तस्बीह और मुसल्ले तक सीमित नही, बल्कि यह ब्राह्माण की हर लहर और हर सितारे पर कमंद डालने का नाम है। दुआ है कि अल्लाह तआला इस्लामी जगत के इस इल्मी किले की सुरक्षा फ़रमाए और सुप्रीम लीडर जैसे नेता की छत्र छाया हम पर बनी रहे, जिन्होने उम्मत को दुबारा सुरय्या तक पहुंचने का मार्ग दिखाया।

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